नई दिल्ली: आज, 6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक अप्रत्याशित घटना घटी, जब एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। इस दौरान उसने “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” का नारा भी लगाया। यह घटना उस समय हुई जब CJI की अध्यक्षता वाली बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे रोक लिया और कोर्ट से बाहर ले गए। इस घटना के बाद कोर्ट की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित हुई, लेकिन बाद में इसे फिर से शुरू किया गया।
क्या था इस हंगामे का कारण?
बताया जा रहा है कि यह घटना खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली से जुड़ी याचिका पर CJI की टिप्पणी के बाद हुई। CJI ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि “जाओ और भगवान से ही कुछ करने के लिए कहो। यह एक पुरातात्विक स्थल है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अनुमति वगैरह देनी होगी।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी, और कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया था।
राकेश किशोर की गिरफ्तारी और “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” कोर्ट घटना
वकील राकेश किशोर को घटना के बाद हिरासत में लिया गया और पुलिस जांच कर रही है। उनके अनुसार, उन्होंने ऐसा धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए किया।
CJI का बयान और कोर्ट की प्रतिक्रिया
CJI बीआर गवई ने कहा:
“इन सब बातों से विचलित मत होइए। हम विचलित नहीं हैं। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।”
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत में कोई भी अशिष्ट या हिंसक हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा और न्यायिक मर्यादा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस घटना ने यह भी उजागर किया कि कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर पुनः विचार करने की जरूरत है।
वकील राकेश किशोर की पहचान और प्रतिक्रिया
जूता फेंकने की कोशिश करने वाले व्यक्ति की पहचान राकेश किशोर के रूप में हुई है। वह सुप्रीम कोर्ट बार में 2011 से रजिस्टर्ड वकील हैं। घटना के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है। राकेश किशोर का कहना है कि उनकी प्रतिक्रिया CJI की टिप्पणी के कारण थी, जो उन्होंने खजुराहो मंदिर मामले में दी थी।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जनता ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने वकील के कार्य को धार्मिक भावना का सम्मान बताया, तो कई लोगों ने इसे असामाजिक और अनुचित करार दिया।सोशल मीडिया पर ट्रेंड #SunatanKaApmaan और #SupremeCourtIncident के तहत लोग इस घटना पर चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन कानून और कोर्ट की मर्यादा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
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धार्मिक संवेदनशीलता और न्यायिक मर्यादा

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है: धार्मिक भावनाओं और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें?भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और संवेदनशीलता का महत्व है। हर नागरिक को अपनी भावनाओं की रक्षा का अधिकार है, लेकिन कोर्ट के भीतर या सार्वजनिक स्थलों पर हिंसा स्वीकार्य नहीं है। इस घटना ने हमें याद दिलाया कि शब्द और कार्रवाई दोनों जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट परिसर में एक वकील द्वारा इस प्रकार की हरकत करना सुरक्षा चूक को दर्शाता है। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को तुरंत पकड़ लिया, लेकिन इस घटना ने न्यायिक सुरक्षा के मानकों पर पुनः विचार करने की आवश्यकता को उजागर किया है।
निष्कर्ष: धार्मिक भावनाओं और न्यायिक मर्यादा का संतुलन
यह घटना यह दर्शाती है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है, लेकिन न्यायिक मर्यादा और कानून का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और स्पष्ट किया है कि अदालत में ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना समाज में धार्मिक संवेदनशीलता और न्यायिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
Q.1. सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील का नाम क्या है?
जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील का नाम राकेश किशोर है। वह सुप्रीम कोर्ट बार में 2011 से रजिस्टर्ड वकील हैं।
Q.2. CJI बीआर गवई ने खजुराहो मंदिर मामले में क्या टिप्पणी की थी?
CJI ने टिप्पणी की थी कि “जाओ और भगवान से ही कुछ करने के लिए कहो। यह एक पुरातात्विक स्थल है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अनुमति वगैरह देनी होगी।”
Q.3 इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्या कदम उठाए हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और स्पष्ट किया है कि अदालत में ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
Q.4 क्या इस घटना के बाद CJI ने कोई बयान दिया है?
हां, CJI बीआर गवई ने कहा, “इन सब बातों से विचलित मत होइए। हम विचलित नहीं हैं। इन बातों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।”








